एक 'चुप ' में हैं दबे बोल कई अनकहे।
ज़रा सा रुको, मन के घाव हैं अभी नए ,
अभी ही धडकनों ने कई घात हैं सहे।
एक 'चुप' में हैं दबे बोल कई अनकहे।
तोड़ो न सहज-सम्बंधों के तार, जीवन -रागिनी लिए,
अवलंबन हैं ये ह्रदय के,नेह-संजीवनी गहे।
एक 'चुप' में हैं दबे बोल कई अनकहे।
मत करो इतना विवश कि ,ये बाँध टूट जाए ,
भावनाओं के सैलाब में फिर क्या-क्या न बहे।
ज़रा सा रुको, मन के घाव हैं अभी नए ,
अभी ही धडकनों ने कई घात हैं सहे।
एक 'चुप' में हैं दबे बोल कई अनकहे।
तोड़ो न सहज-सम्बंधों के तार, जीवन -रागिनी लिए,
अवलंबन हैं ये ह्रदय के,नेह-संजीवनी गहे।
एक 'चुप' में हैं दबे बोल कई अनकहे।
मत करो इतना विवश कि ,ये बाँध टूट जाए ,
भावनाओं के सैलाब में फिर क्या-क्या न बहे।
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