भीतर मन में बेचैनी है, बाहर बड़े झमेले हैं।
छुद्र स्वार्थ भरे जग में ,जीवन के सुख-दुःख झेले हैं।
अब कैसे छूटेगा ये ,जन्म-मरण का बंधन शाश्वत ,
हर पल मन अब तडपे है ,मुक्ति की राह टटोले है।
छुद्र स्वार्थ भरे जग में ,जीवन के सुख-दुःख झेले हैं।
अब कैसे छूटेगा ये ,जन्म-मरण का बंधन शाश्वत ,
हर पल मन अब तडपे है ,मुक्ति की राह टटोले है।
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